http://khabar.ndtv.com/news/india/defiant-prashant-bhushan-yogendra-yadav-take-on-aap-leadership-as-truce-talks-fail-749921?utm_source=taboola-dont-miss
योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे सजग लोगों का टीम केजरीवाल जिसमें महाभ्रष्ट नुमा लोग ऐसी की तैसी कर रहे हैं, ये देश को कितना नुक़सान पहुँचाएँगे उसकी ये एक बानगी मात्र है ये।
जो व्यक्ति मंच से बिहार और उ.प्र. की कुछ जातियों को गाली देता हो, उस पार्टी में भाई योगेन्द्र जी की इस दुर्गति पर मुझे कम से कम कोई आश्चर्य नहीं है !
मेरी सोच और पुख़्ता हो रही है कि जिस जातीय संकीर्णता के योगेन्द्र जी विरोधी रहे हैं, उसी जातीय जकड़ के वे शिकार हो रहे हैं, जाति आपको बुरी लगती होगी यादव जी लेकिन जिनका वजूद ही जाति की वजह से है?
अन्यथा दो कौड़ी के लोग आपका तमाशा खड़ा करें, कहाँ खड़े हैं आप यह मैंने इसी फेब के पिछले पोस्ट पर लिख चुका हूँ। आपका जो कुछ हो रहा है मेरे लिये बिलकुल नया नहीं है मुझे पता था यही होना था, जो डर है वो ये कि प्रशांत भूषण आपके साथ कब तक खड़े रहेंगे।
दूसरी ओर जो आपमें संभावनाएँ देख रहे होंगे उनकी निराशा का क्या होगा, माननीय यादव जी आप जिस नैतिकता और मूल्यों की बात इनसे करते हैं बेमानी है।
मुझे नहीं लगता कि आप ऐसा कर पाएँगे पर आप ये सब उनके साथ करते जिनकी पहचान में आप भी एक कड़ी हैं तो उनका कितना भला होता, राजेन्द्र जी भी आजीवन इस व्रत का अनुपालन किये और आप ने यही कहा था कि जातीय मंचों पर जाने से क़द घटता है और वहाँ जो लोग हैं वे मिशनरी नहीं हैं!
यादव जी ! आपने इन्हें कमतर आँका ये जैसे भी थे जब आप जैसा क़ाबिल, विचारवान नेत्रित्व उन्हे मिलता और आपको भी वो लोग जिन्हें वास्तव में आप जैसे लीडर की निहायत ज़रूरत भी है पर आप इन सुविधाभोगियों के साथ खड़े हैं ये आप को नहीं पचा पाएँगे ?
नई राजनीति की राह रूकी नहीं है खुली है यादव जी आगे आईए साथ आयें भूषण जी तो उनको भी लाईए वो लोग आपका इंतज़ार कर रहे हैं जिन्हें आप से डर नहीं लगता !
बैठिएगा नहीं !
-डा. लाल रत्नाकर
योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे सजग लोगों का टीम केजरीवाल जिसमें महाभ्रष्ट नुमा लोग ऐसी की तैसी कर रहे हैं, ये देश को कितना नुक़सान पहुँचाएँगे उसकी ये एक बानगी मात्र है ये।
जो व्यक्ति मंच से बिहार और उ.प्र. की कुछ जातियों को गाली देता हो, उस पार्टी में भाई योगेन्द्र जी की इस दुर्गति पर मुझे कम से कम कोई आश्चर्य नहीं है !
मेरी सोच और पुख़्ता हो रही है कि जिस जातीय संकीर्णता के योगेन्द्र जी विरोधी रहे हैं, उसी जातीय जकड़ के वे शिकार हो रहे हैं, जाति आपको बुरी लगती होगी यादव जी लेकिन जिनका वजूद ही जाति की वजह से है?
अन्यथा दो कौड़ी के लोग आपका तमाशा खड़ा करें, कहाँ खड़े हैं आप यह मैंने इसी फेब के पिछले पोस्ट पर लिख चुका हूँ। आपका जो कुछ हो रहा है मेरे लिये बिलकुल नया नहीं है मुझे पता था यही होना था, जो डर है वो ये कि प्रशांत भूषण आपके साथ कब तक खड़े रहेंगे।
दूसरी ओर जो आपमें संभावनाएँ देख रहे होंगे उनकी निराशा का क्या होगा, माननीय यादव जी आप जिस नैतिकता और मूल्यों की बात इनसे करते हैं बेमानी है।
मुझे नहीं लगता कि आप ऐसा कर पाएँगे पर आप ये सब उनके साथ करते जिनकी पहचान में आप भी एक कड़ी हैं तो उनका कितना भला होता, राजेन्द्र जी भी आजीवन इस व्रत का अनुपालन किये और आप ने यही कहा था कि जातीय मंचों पर जाने से क़द घटता है और वहाँ जो लोग हैं वे मिशनरी नहीं हैं!
यादव जी ! आपने इन्हें कमतर आँका ये जैसे भी थे जब आप जैसा क़ाबिल, विचारवान नेत्रित्व उन्हे मिलता और आपको भी वो लोग जिन्हें वास्तव में आप जैसे लीडर की निहायत ज़रूरत भी है पर आप इन सुविधाभोगियों के साथ खड़े हैं ये आप को नहीं पचा पाएँगे ?
नई राजनीति की राह रूकी नहीं है खुली है यादव जी आगे आईए साथ आयें भूषण जी तो उनको भी लाईए वो लोग आपका इंतज़ार कर रहे हैं जिन्हें आप से डर नहीं लगता !
बैठिएगा नहीं !
-डा. लाल रत्नाकर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें